गुरुवार, 25 दिसंबर 2008

विज्ञान कथा- बदलता क्षितिज

``साहब, साहब शेरनी मीतू ने फिर एक महिला को मार दिया´´ हांफते हुए फारेस्ट रेंजर ने कहा।

``ओह नो!´´ गिर राष्ट्रीय उत्थान के निदेशक इस सूचना पर आहत हुए। ``कब, कहां?´´ उन्होंने पूछा।

``बांधवा ताल के पास आज दोपहर में, जब वह अपने खेत में काम कर रही थी।´´

``ड्राइवर से बोलो, जीप निकाले´´ निदेशक ने कहा और खूंटी पर टंगे कोट उतारकर कंधे पर ले लिया।

गिर के राष्ट्रीय उद्यान के शेरों द्वारा यह पच्चीसवां मानव वध था। शेरों द्वारा पन्द्रह मानव वध के बाद मामला संसद तक में गूंज गया था। अंतत: वन मंत्रालय ने एक जांच समिति गठित करके उसे अविलम्ब जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। जा¡च के बाद समिति के विशेषज्ञों ने पाया कि इन पन्द्रह मानव वधों के लिए कोई एक आदमखोर शेरनी जिम्मेदार नहीं है बल्कि शेरनी का पूरा कुनबा, जिसमें तीन शेरनियां और उसके चार किशोर शावक थे, जिम्मेदार हैं।

``यह नहीं हो सकता´´, गिर राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक ने कहा।

``पर रिपोर्ट तो यही कह रही है।´´ जांच दल का एक सदस्य बोला।

``व्हाट रबिश क्‍या आप लोगों को भी किसी शेर या बाघ के नरभक्षी होने का कारण बताना होगा। डोंट से लाइक दिस। शेर का पूरा कुनबा आदमखोर हो गया है।´´ रिपोर्ट पर मंत्रणा के दौरान निदेशक आपे से बाहर हो गए थे। सचमुच यह गले उतरने वाली बात थी भी नहीं। ``अब मैं मंत्रालय को क्या लिखूंगा, भेज दूं कि तीन शेरनियां और उसके चार किशोर शावक आदमखोर हो गए हैं।

``पर सच तो यही है।´´ जांच दल के मुखिया ने कहा।

``मि0 सिंह कैसे मान लूं कि जा¡च रिपोर्ट गलत नहीं हो सकती हैं पैंतीस साल के अपने वाइल्ड लाइफ एक्सपीरियन्स से मैं कह रहा हू¡ कि यह अनहोनी बात है।´´

``अब जो भी हो सर पर मैं दावे के साथ कह सकता हू¡ कि जांच रिपोर्ट में कहीं से भी लेकिन नहीं लगाया जा सकता है।

``तो ठीक है, मैं आपकी यह रिपोर्ट मंत्रालय को फारवर्ड कर दे रहा हू¡। यह लिखते हुए कि रिपोर्ट की सत्यता इस आधार पर संदिग्ध है कि अब तक की जानकारी के अनुसार शेरों या बाघों के पूरे समूह का नरभक्षी होना नहीं देखा गया है।´´

मंत्रालय ने निदेशक की टिप्प्णी को संज्ञान में लेते हुए और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पुन: जांच के लिए एक समिति का गठन किया जिसका मुखिया प्रमुख शेर विशेषज्ञ बाब हडसन को बनाया गया।

``मि0 हडसन आपकी रिपोर्ट तो और भी अिèाक अविश्वसनीय है।´´ गिर के राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक ने कहा। वे बाब हडसन जा¡च समिति की रिपोर्ट पर मंत्रणा के दौरान बोल रहे थे।

तभी मंत्रणा कक्ष का दरवाजा हल्के से खुला। सभी की निगाहें दरवाजे पर भागी। निदेशक की भवें तन गईं क्योंकि मंत्रणा के दौरान किसी भी तरह के व्यवधान के लिए उनकी सख्त मनाही होती थी।´´ सर अभी-अभी शत्रुन्जी नदी के किनारे एक शेर ने एक आदमी को मार दिया।´´

`व्हाट!´´ निदेशक के मु¡ह से निकला! तब तक उनका पीण्एण् डोरक्लोजर युक्त दरवाजा, जो उसने पकड़ रखा था, को छोड़कर जा चुका था।

``मिण् डायरेक्टर, यह उन आदमखोर शेरनियों का चौबीसवा¡ शिकार था।´´ बाब हडसन ने कहा। ``और ऐसे ही चलता रहा तो ´´ उन्होंने बात अधूरी छोड दी।

निदेशक ने अपनी आंखें बंद कर लीं। वे ध्‍यानमग्न की मुद्रा में आ गए। कुछ मिनट बाद जब उन्होंने आ¡खें खोलीं, तब भी उनका चेहरा उनकी परेशानी की गवाही कर रहा था। उन्होंने रिपोर्ट फाइल का पन्ना पलटना शुरू कर दिया। फिर बाब हडसन की तरफ देखते हुए बोले- ```सचमुच यह एक अनहोनी बात है और भारतीय वन्य जीव अधिनियम के अनुसार शेर या बाघ के मानव भक्षी होने पर उसे या तो पकड़कर चििड़याघर का रास्ता दिखाया जाता है या फिर गोली मार दी जाती है। और यदि हम ऐसा करते हैं तो गिर का उद्यान शेरों से खाली हो जाएगा।´´ निदेशक अंतिम शब्द तक आते-आते और भी अनमने से हो गए। उन्होंने मीटिंग का अवसान कर दिया।

बाब हडसन समिति ने अपनी जा¡च में पाया था कि मानव भक्षी कृत्य के लिए शेरनी का एक कुनबा नहीं अपितु तीन से चार कुनबे जिम्मेदार हैं। बेशक उनकी यह बात गले से उतरने वाली नहीं थी, पर सच्चाई यही थी।

``क्रिस तुम्हें नहीं लगता कि सैम में वह फुर्ती और तेजी नहीं है जो अमूमन उस उम्र के हार्पि ईगल में होनी चाहिए।´´

``मैं भी यही सोच रहा था जेनी कि अब उसके मा¡-बाप शिकार कर लाए गए किसी जानवर को घोंसले में छोड़ देते हैं तो वह उसे खाता जरूर है, पर उस भूत शिकार के साथ वह वैसा व्यवहार नहीं करता जैसा कि उस उम्र के हार्पि ईगल को करना चाहिए।´´ क्रिस्टोफर ने इन शब्दों के साथ अपनी पत्नी की बात का समर्थन किया।

क्रिस्टोफर और उसकी पत्नी जेनी कोलांबिया के घने वषाZ वनों में पिछले चार वर्षों से हार्पि ईगल पर शोध कार्य कर रहे थे। उनका यह कार्यक्रम `एसोसिएशन फार वाइल्ड लाइफ´ की तरफ से प्रायोजित था। एसोसिएशन वाइल्ड लाइफ पर शोध के साथ-साथ उस पर डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाती थी।

सैम पर निरीक्षण के दौरान क्रिस्टोफर परिवार ने पाया कि अपनी प्राकृतिक प्रवृत्ति के अनुसार सैम के किशोर होने के बाद उसके बाप ने उसे घोंसला छोड़ने पर मजबूर किया और आक्रामक मुद्दा अख्तियार करते हुए उस पर हार्पि ईगल की तरह उसने अपना बचाव करने का प्रयास नहीं किया और न ही वह छोटी उड़ान भर के किसी सुरक्षित जगह पर उतरा बल्कि उड़ान भरते जाते देख उसके मां-बाप दोनों ही चिंतित हो गए ओर उसके पीछे हो लिए। अंतत: जब सैम में उड़ान भरने की शक्ति नहीं रह गई तो वह बेदम होकर जमीन पर उतर गया- लगभग भहराया हुआ-सा। चीलों के किशोर होने के बाद मां-बाप द्वारा उसे घोंसले से खदेड़ने की प्रवृत्ति उसे आत्म निर्भर बनाना और जीवन संघर्ष के लिए प्रशिक्षित करना होता है। खदेड़ने के कुछ दिनों बाद तक उस किशोर के मां-बाप उसकी निगरानी करते हैं, उसे भोजन उपलब्ध कराते हैं पर यह सैम तो एकदम अलग व्यवहार कर रहा था।

गर्मियों की एक शाम जब कोलंबिया की खड़ी पहािड़यों के नीचे के घने जंगलों में धुंधलका उतरने लगा था तो क्रिस और जेनी के साथ-साथ उनकी टीम के दोनों कैमरामैन भी कैमरा समेटने के काम में जुटने लगे। तभी क्रिस को सामने की पगडंडियों के ऊपर बुल उड़ता हुआ दिखा। क्रिस ने दोनेां कैमरामैनों का सचेत किया। वे एक ऊंची पहाड़ी पर थे ओर पगडंडी सामने नीचे के जंगलों से निकलकर गा¡व की ओर जाती थी।

बुल के मंडराने का हाव-भाव यह दर्शा रहा था कि वह किसी शिकार की ताक में है और उसका शिकार कहीं आस-पास ही है पर यह क्या? क्रिस ओर जेनी के साथ-साथ उन दोनों कैमरामैन को भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। उस हार्पि ईगल `बुल´ ने पगडंडियों से जाती सात-आठ वर्षीय एक बालिका पर आक्रमण किया था। लड़की अपने ऊपर हुए अचानक आक्रमण से चीखते हुए भागने लगी पर बुल बार-बार उस पर आक्रमण किए जा रहा था। लड़की का तेज-तेज चीखना दूर काम कर रही दो महिलाओं ने सुना। वे तेजी से भाग कर आईं। बुल उन्हें देख क गोल-गोल ग्लाइड करने लगा और फिर उड़ गया। क्रिस और जेनी के लिए यह अनहोनी बात थी। बुल को वे अच्छे से जानते थे। सैम के हम उम्र बुल का व्यवहार भी लगभग सैम के तरह ही था। जब उसके पिता ने उसे घोंसला छोड़ने पर मजबूर किया तो वह सैम क तरह ही बचाव का कोई प्रयास किए बगैर उड़ता ही चला गया था।

अपने डेरे पर लौटकर क्रिस्टोफर कॉफी का एक बड़ा मग लेकर हार्पि ईगल के अजीब व्यवहार पर विचार करने लगे और जेनी रोज की भांति डाक देखने लगी। आज बस दो ही डाक थी जिसमें से एक वाइल्ड लाईफ की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका थी। वह पत्रिका पलटने लगी और आवरण कथा पर आकर रुक गई। आवरण कथा गिर के राष्ट्रीय उद्यान के शेरों के नरभक्षी होने पर थी- बॉब हडसन की रिपोर्ट के साथ पत्रिका लिए क्रिस्टोफर के पा चली आयीं। क्रिस्टोफर के सामने जेनी ने पत्रिका रख दी।

रात में सोने के पूर्व क्रिस्टोफर ने उस पत्रिका में छपी रिपोर्ट पर ध्यान केिन्द्रत किया। अचानक उन्हें लगा कि गिर के राष्ट्रीय उद्यान के शेरों के नरभक्षी होने और बुल के मानव पर आक्रमण करने में कहीं न कहीं समानता जरूर है। उसे रात भर नींद नहीं आई और अगली सुबह जब अपनी नियमित दिनचर्या के लिए, जैनी तैयार होने लगी तो क्रिस्टोफर ने उसे यह कहकर अकेले जाने को कहा कि उसकी तबियत कुछ नासाज है और वह डेरे पर रहकर ही कुछ काम करना चाहता है। वह दिन भर वाइल्ड लाइफ से संबंधित साइट पर करता रहा, इस तरह को कोई अजूबा सूचना पाने के लिए, जैसा कि गिर के राष्ट्रीय उद्यान में घट रहा था या जैसा कि हार्पि ईगल ने किया था। जब जेनी लौटी तब भी क्रिस्टोफर अपने कम्प्यूटर पर पूरा दिन खपाने के बाद भी क्रिस्टोफर ने दुनिया के किसी कोने में वाइल्ड लाइफ के संदर्भ में कुछ अजीब घटता हुआ नहीं पाया।

``कैसे हो मार्टिन।´´

`` बढ़िया´´, कंधे पर पीछे से हाथ रखने वाले की बात का मार्टिन ने जवाब दिया और पलट कर देखा कि वह कौन है- ``अरे क्रिस्टोफर तुम´´ मार्टिन ने उसे बांहों में भर लिया।

``कैसे हो?´´ मार्टिन ने पूछा।

``बस जैसा साल भर पहले था, एकदम मस्त।´´ क्रिस्टोफर ने मार्टिन की पीठ पर हल्की थपकी देते हुए बोला।

वे दोनों एसोसिएशन फार वाइल्ड लाइफ की भव्य इमारत की चौथी मंजिल के बरामदे में थे। मार्टिन क्रिस्टोफर की तरह ही एसोसिएशन का एक शोधकर्ता था।

``बहुत दिनों बाद मिले हो दोस्त, और बताओ´´ मार्टिन क्रिस्टोफर के साथ बहुत ही उत्साहित था ``चलो, कैंटीन में बैठते हैं।´´ मार्टिन ने कहा।

``मुझे हार्पि ईगल पर शोध कार्य की प्रगति रिपोर्ट जैसी करनी हैद्व तुम्हें क्या काम है?´´ क्रिस्टोफर ने कहा।

``हा¡ यह ठीक है, काम निपटाकर इत्मीनान से ग्यारह बजे कैन्टीन में मिलते हैं?´´ मार्टिन ने कहा।

वे दोनों बचपन के साथी थे। कैन्टीन में उन लोगों की बातें जब शुरू हुई। तो उसका सिलसिला एक बजे तक थमा नहीं। घर-परिवार की ढेर सारी बातों के बाद जब क्रिस्टोफर ने मार्टिन से उसके काम के बारे में पूछा तो वह कुछ उदास-सा हो गया। मार्टिन ने प्लेट में बचे सलाइ के आखिरी टुकड़े को उठाया और अनमने से उसे देखने लगा। किसी की छोटी-से-छोटी असामान्य क्रियाकलाप भी आपको उसकी मन:स्थिति बता सकती है बशर्ते आप उसके साथ संबंधों को जा रहे हों।

``क्या बात है मार्टिन।´´ क्रिस्टोफर ने कुछ बेचैनी से पूछा।

मार्टिन नैपकीन निकालकर हाथ साफ करने लगा। पूरे इत्मीनान के बाद वह मुड़े-टुड़े नैपकीन को जूठी प्लेट में डाला और पानी का ग्लास उठा लिया- ``मैं एसोसिएशन से अलग हो रहा हू¡´´ आधा ग्लास खत्म करने के बाद मार्टिन बड़े ही शांत भाव से बोला।

``क्यों?´´ क्रिस्टोफर के लिए यह बेहद चौंकाने वाली सूचना थी।

जूलिया बर्ने एसोसिएशन फार वाइल्ड लाइफ में एसोसिएट साइंटिस्ट के पद पर कार्यरत थी पर अपनी क्षमता और काबलियत के कारण वह एसोसिएशन के प्रोजेक्ट रेगुलेटरी बोर्ड की अध्यक्ष नियुक्त कर दी गई थीं। एसोसिएशन की अधिकारिता नियमावली (डेलिगेट्स ऑफ पावर) के अनुसार पांच सदस्यीय बोर्ड की एसोसिएशन के समस्त परियोजना कार्यक्रम पर निगरानी रखनी थी। बोर्ड किसी परियोजना कार्यक्रम को गुण-दोष के आधार पर बीच में रोकने का या उसमें संशोधन करने की संस्तुति बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को दे सकता था। एसोसिएशन का कोई भी परियोजना कार्य बोर्ड के अनुमोदन के बिना संभव नहीं था। जूलिया बर्ने के अध्यक्ष बनने के पहले बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की आ¡खों की किरकिरी बन गई थी।

गोर्वी मरुस्थल में ऊंटों पर काम कर रहे मार्टिन ने अपनी तिमाही रिपोर्ट में कुछ किशोर और बछड़े ऊ¡टों के असामान्य व्यवहार की बात कही थी और एसोसिएशन से यह अनुरोध किया था कि वह एक चिकित्सक को अविलम्ब भेजे क्योंकि ये ऊंट किसी बीमारी से ग्रस्त लगते है। ओर जब गोर्वी मरुस्थल के उन किशोर ओर बछड़े ऊंटों के असामान्य व्यवहार के कारण कोई बिमारी नहीं अपितु उनका भिन्न पारिस्थितिकी तंत्र के साथ सामंजस्य न बैठा पाना था सामान्य व्यवहार वाले सारें ऊ¡ट विजातीय नस्ल के थे उनके पिता तो गोर्वी के ऊंट थे पर मा¡ पालतू भारतीय नस्ल की थी। बेशक वे वैज्ञानिक तरीके से पैदा किए गए ऊंट थे पर उनके माता-पिता को परिवेश भिन्न था और दोनों के जेनेटिक गुण उनमें थे और यही उन्हें सरवाइव करने में बाधा उत्पन्न कर रहा था, जो उनके असामान्य व्यवहार का कारण था।

जूलिया बर्ने ने उनकी रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए अविलंब इस तरह के सारे प्रोजेक्ट कोरोकने और उन सबकी जा¡च के लिए एसोसिएशन के बोर्ड ने इस तरह के पुराने परियोजना कार्यक्रमों की जांच की तो तथ्य और चौंकाने वाले थे। कमोवेश कोई न कोई असमानता इस तरह से उत्पन्न सभी जीवों में परिलक्षित थी। बावजूद इसके इस तरह के सारे परियोजना कार्यक्रमों पर पिछले प्रोजेक्ट रेगुलेटरी बोर्ड ने कोई कदम नहीं उठाया था।

बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की तरफ से पांचवें दिन ही जूलिया बर्ने के पत्र का जवाब आ गया कि यह एक गंभीर विषय है और इस पर अविलम्ब एक मीटिंग आहूत की जाए। पर जैसा कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का पत्र आया था, मंशा उसके एक कदम उलटी थी।

``मैडम जूलिया एसोसिएशन पिछले पचास वर्षों के वाइल्ड लाइफ पर काम कर रही हैं। हम लोग पूरे विश्व में हर जीव-जंतु पर अध्ययन एवं शोध कार्य कर रहे है। दो भिन्न नस्लों द्वारा वैज्ञानिक तरीके से संतान उत्पत्ति भी हमारी परियोजना कार्यक्रमों का एक हिस्सा है। इससे हम तो बचाते ही हैं, उन्हें भिन्न वातावरण में सरवाइव करने में एक सदस्य ने मीटिंग की प्रारंभिक औपचारिकता के बाद जूलिया बर्ने को संतुष्ट करने की नीयत से यह बात कही।

``यह बात सुनने में अच्छी लग सकती है और कितना अच्छा होता कि ऐसा होता भी, पर अफसोस ऐसा नहीं हो रहा है।´ दो भिन्न नस्लों की संतानों में विकृति उत्पन्न हो रही है।´´ जूलिया बर्ने ने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य की बात को बड़ी शालीनता से खारिज किया।

``जब हम बड़े पैमाने पर कार्य करते हैं तो ऐसी बहुत-सी अनियमितताओं को इगनोर करना पड़ता है, माई डियर यंग लेडी।´´ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सबसे वरिष्ठ सदस्य ने जुलिया बर्ने से यह बात बड़े ही आत्मीय लहजे में कही। `डियर लेडी, हमें बहुत-सा काम करना है और तुम्हें भी। फिर तुम्हें तो बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी आना है। शायद अगले साल हीण्ण्ण् जब मैं हटूंगा।´´ लालची को भेंट और महत्वाकांक्षी को उसके चाहत अनुरूप ऑॉफर देकर मनचाहा कराया जा सकता है, वरिष्ठ सदस्य का अनुभव यह कहता था, पर वे गलत थे।

``थैंक्स सर, पर मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि आपकी बात सही नहीं है। बड़े पैमाने पर काय करने का अर्थ यह तो नहीं हो जाता कि हम कुछ भी इगनोर कर जाएं। मैं माननीय सदस्यों से यह विनम्रतापूर्वक कहना चाहूंगी कि हमारा पारिस्थितिकी तंत्र बड़ा ही नाजुक है और धरती का प्रत्येक जीवधारी एवं वनस्पति इसके महत्वपूर्ण घटक हैं। किसी के साथ भी छेड़छाड़ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती है भले ही वह हमें प्रत्यक्ष न दिखे पर अंततोगत्वा परिणाम तो आता ही है उसका। अत`: बेहतर होगा कि हम अपने परियोजना कार्यक्रमों में सुधार करें।´´

पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को जुलियर्स बर्ने का कोई तर्क प्रभावित नहीं कर पाया क्योंकि वे वहां उससे तर्क-विर्तक या सही-गलत पर विचार-विमर्श करने नहीं आए थे अपितु एक तेज-तर्रार महिला को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के हिसाब से काम करने की सांकेतिक धमकी देने आए थे (वो जब जूनिलया नहीं मानी तो अगले हफ्ते बोर्ड ने रेगूलेटरी बोर्ड कोक निलिम्बत कर उसका सारा कार्यभार अपने हाथों में ले लिया। ``हम हार गए मार्टिन´´, जूलिया ने कहा। वह उसी शाम उदास मार्टिन के साथ कैन्टीन में बैठी थी।

``हम हारे नहीं हैं बल्कि इस बार सफल नहीं हुए हैं क्योंकि सारा कुछ उनके हाथ में था, पर हम लड़ेंगे और जीतेंगे।´´ मार्टिन ने जूलिया के बालों में हाथ फिराते हुए उसमें आत्मविश्वास पैदा किया।

और उसी शाम दोनों ने एसोसिएशन के साथ जुड़े रहकर लड़ाई लड़ने का साहसिक निर्णय लिया। पर दो माह में ही एसोसिएशन ने उन पर इतना बदलाव दिया कि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने पर मानसिक तौर पर मजबूर हो गए। और इसी मन:स्थिति में मार्टिन की पीड़ा कैंटीन में क्रिस्टोफर के सामने फूट पड़ी और उसने एसोसिएशन छोड़ देने की बात कह दी।

क्रिस्टोफर के लिए मार्टिन द्वारा दी गई सूचना वििस्मत कर देने वाली थी। ``यह सब तुमने मुझे क्यों नहीं बताया ण्ण्ण्मार्टिन´´ क्रिस्टोफर ने कहा। मार्टिन शांत बना रहा।

``मार्टिन, मैं पिछले माह बहुत परेशान रहा अपन हार्पि से लेकर। उनके असामान्य व्यवहार को मैं समझ नहीं पा रहा था पर अब समझ मैं आर रहा है। निश्चित ही छानबीन करने पर कारण वही होगा जो अन्य जीवों के लिए है´´ क्रिस्टोफर ने उठकर मार्टिन का कंधा पकड़कर उसे `पुशअप´ किया।

`क्या मनुष्यों के लिए वह वह बातें कही जाती है। मंगोलिया का कोई पुरुष किसी अमेरिकी सुंदरी से शादी करने के लिए स्वतंत्र है तो पृथ्वी के किसी एक भाग में पाए जाने वाले शेर का किसी दूसरे भू-भाग की श्योरनी के साथ ब्रीडिंग क्यों नहीं कराया जा सकता है। अनुवांशिक प्रदूषण की बात हम केवल जानवरों के संदर्भ में ही क्यों करते हैं।´´ एसोसिएशन प्रकृति के कार्यों में छेड़छाड़ कर रहा है, बचकानी बात मानता हूं। हम प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाकर कार्य कर रहे हैं एक ही समुदाय में लगातार ब्रीडिंग नस्लीय दुर्बलता पैदा करता है। हम इन खबरों को टालने के लिए एक भू-भाग के जानवरों के बीच ब्रीडिंग कराते हैं। संरक्षित उद्योगों एवं वन क्षेत्रों में विश्व के कई देशों की सरकारों भी ऐसा कराती हैं। हममें फर्क मात्रा इतना है कि हमारा क्षेत्र व्यापक है।´´

क्रिस्टोफर और जेनी ने एसोसिएशन छोड़ दी। इस बात से वे गहरे तक आहत थे कि जिस एसोसिएशन से जुड़े थे। उसने अनुसंधान के नाम पर प्रकृति के कार्यों में हस्तक्षेप किया। बेशक उन्नत नस्ल मानव के लिए लाभकारी है पर उन बातों को कैस न्यायसंगत ठहराया जा सकता है, जहां जानवरों पर अनुवांशित प्रदूषण अधिरोपित हुआ है और जो वास्तव में अब स्वाभाविक रूप में नहीं रह गए हैं उन नस्लों का भविष्य क्या होगा। जो जाने अनजाने अनुवाशिंक प्रदूषण से ग्रस्त हो गए हैं? बेशक यह बहुत ही गहनता सूक्ष्मता से समझने वाली बात है कि हमारे द्वारा किए गए क्रियाकलापों का दूरगामी परिणाम क्या होगा? आनुवांशिक प्रदूषण से ग्रस्त नस्लें कालांतर में पूरे इको सिस्टम को प्रभावित करें- भले ही यह प्रभाव प्रत्यक्ष न दिखे या सूक्ष्म रूप में हो, पर यह होगा जरूर।

जैसा कि हर व्यक्ति को उसके परिवार के हर सदस्य के साथ लगाव एवं उसके हर पहलू की जानकारी होती है, वैसा ही पर्यावरण के साथ भी हो- ऐसा भागीरथ प्रयास का बीड़ा क्रिस्टोफर और जेनी ने उठाया। क्योंकि वे मानते थे कि पर्यावरण भी हमारे परिवार का सदस्य है। पर्यावरण के अस्वस्थ होने पर हर व्यक्ति के जीवन राग की लय ठीक उसी प्रकार गड़बड़ाती है जिस प्रकार परिवार के किसी सदस्य के गम्भीर रूप से बीमार होने पर।

उन्होंने एसोसिएशन के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पूरे इको सिस्टम को बिगाड़ने एवं उसके कार्यों पर रोक लगाने के लिए प्रार्थना की। न्यायालय को लगा कि क्रिस्टोफर द्वारा उठाई गई बातें गम्भीर संकट की ओर संकेत हैं। अत: न्यायालय ने इस पर सुनवाई के लिए खंडपीठ का गहन कर दिया और आज उस पर बहस हो रही थी।

``आई आब्जेक्ट मी लार्ड।´´ क्रिस्टोफर के वकील ने एसोसिएशन के वकील की बात केा काटते हुए आपत्ति जताई।

``आप अपनी बारी का इंतजार करें। उन्हें अपनी बात कह लेने दीजिए।´´ न्यायाधीश ने क्रिस्टोफर के वकील से कहा।

``थैंक्स मी लार्ड´´ कहने के साथ एसोसिएशन के वकील ने फिर से अपनी बात रखनी शुरू की। ``मी लार्ड जैसा कि एसोसिएशन फॉर वाइल्ड लाइफ के खिलाफ वाद में यह कहा गया है कि एसोसिएशन के बीडिंग एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जानवरों को अधिरोपित करने के कारण ही जानवरों के स्वाभाविक व्यवहार में परिवर्तन आया है, भी आधार ही है। एसोसिएशन फॉर वाइल्ड लाइफ ने दुनिया भर के उन लोगों पर एक अèययन कराया है जिसके मां-बाप अलग-अलग भूभागों के थे।

अध्ययन में यह पाया गया कि ऐसे व्यक्तियों की सूझबूझ, बुिद्ध-कौशल और सफलता की दर सामान्य से अधिक है।´´ एसोसिएशन के वकील ने कथित अध्ययन की फाइल न्यायाधीश के कार्यपालक अधिकारी की ओर बढ़ा दी। उसने कोट की बाईं जेब से रूमाल निकालकर बाएं गाल पर फिराया। फिर बोलना जारी रखा- ``योर ऑनर, उन जानवरों के विचित्र व्यवहार के कारणों पर भी एसोसिएशन के वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं और उनकी भी रिपोर्ट शीघ्र ही न्यायालय में प्रस्तुत कर दी जाएगी। पर जैसा कि दुनियाभर के अèययनों का निष्कर्ष यह बताता है कि विजातीय नस्ल की सन्तानें सामान्य से अधिक बुिद्ध-कौशल वाली होती हैं, उन जानवरों के अस्वाभाविक व्यवहार के सन्दर्भ में भी यही बात हो सकती है। थैंक यू मी लार्ड´´ एसोसिएशन के वकील ने अपनी बात समाप्त की।

एसोसिएशन के वकील द्वारा अपनी दलील समाप्त करने के बाद क्रिस्टोफर के वकील बड़े ही आराम से उठे और हल्की चाल से अपना पक्ष रखने के लिए आए। ``मी लार्ड जैसा कि मामला अनुवांशिक प्रदूषण का है, मैं सबसे पहले अनुवांशिक प्रदूषण को डिफाइन करना चाहूंगा।´´ वे पल भर के लिए रूके। जज महोदय ने सर हिलांकर उन्हें बोलने की स्वीकृति दी। ``इस धरा पर पाए जाने वाले समस्त जीवधारियों की नस्लें अपनी-अपनी भौगोलिक पर्यावरण की विशिष्टताओं के अनुरूप विकसित होती हैं। इन नस्लों के विकास में वहा¡ की जैव विविधता और पर्यावरण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। जीवों के लाखों बर्षों के विकास में उनके जीन में उस क्षेत्र विशेष की जैव विविधता, वायु, जल आदि के अनुरूप जीवित रहने का गुण संग्रहित होता रहता है और ये गुण कुछ और समृद्ध होते हुए अगली पीढ़ी में जीन के माध्यम से जाते हैं।

अब यदि एक पर्यावरण में विकसित हुए जीव को किसी दूसरे भिन्न पर्यावरण में आरोपित किया जाए या भिन्न वातावरण के दो जीवों से सन्तान उत्पन्न कराई जाएं तो उनके अनुवांशिक गुणों में दोष उत्पन्न हो सकता है जिससे उनके व्यवहार में परिवर्तन आ सकता है। यही अनुवांशिक प्रदूषण है।´´ उन्होंने पाकेट से एक स्लिप निकाला, उससे देखा, फिर माननीय जज की ओर मुखातिब हुए- ``मी लार्ड जैसा कि मेरे साथी वकील ने मनुष्यों के अनुवांशिक प्रदूषण को इस केस के साथ जोड़ने का प्रयास किया है, मेरी समझ से यह केस को उलझाने का एक बहाना मात्र है। वास्तव में मनुष्यों के सन्दर्भ में अनुवांशिक प्रदूषण की बात करना बेमानी है क्योंकि मनुष्य जानवरों से बहुत आगे का जीव है।

अनुवांशिक प्रदूषण का खतरा जिस प्रकार जानवरों और पक्षियों को प्रभावित कर सकता है, उस प्रकार मनुष्यों को नहीं क्योंकि विषम से विषम परिस्थितियों का सामना मनुष्य अपने बुिद्ध-कौशल से कर सकता है पर जानवरों एवं पक्षियों में वह काबिलियत नहीं होती है।´´

वे अपना वाक्य समाप्त करते-करते अपनी मेज तक आए और मेज पर पड़ी लाल रंग की फाइल उठाया, ``मी लार्ड, मैं कोर्ट को अनुवांशिक प्रदूषण के खतरे की एक और सच्चाई को बताना चाहूंगा- वो यह कि यह कोई ऐसा खतरा नहीं है जिसका परिणाम हमें तुरन्त दिखे और यह किन-किन रूपों में हमारे सामने आएगा, इसकी पूर्व कल्पना भी असंभव है। इसकी भयावहता इसी से आंकी जा सकती है कि यह पृथ्वी के पूरे इको सिस्टम को ही ध्वस्त कर देगा, उसमें एक अजीब-सी विकृति उत्पन्न कर देगी।´´ उन्होंने बोलते हुए ही उस फाइल के कुछ पन्ने पलटे ``योर ऑनर, अनुवांशिक प्रदूषण की भयावहता पर मैंने कुछ नामी-गिरामी जीव विज्ञानी एवं पर्यावरण विशेषज्ञों की ओपीनियत ली है और उनके अनुसार, यदि ऐसा ही चलता रहा तो इसका परिणाम हमारी कल्पना से कहीं ज्यादा भयावह होगा।´´ वे फाइल कार्यपालक अधिकारी को बढ़ा दिए।´´ अत: मैं इस कोर्ट से गुजारिश करता हू¡ कि इस पृथ्वी को बचाए रखने के लिए, इसकी प्राकृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए एसोसिएशन के कार्यों पर तुरन्त रोक लगाएं।´´

क्रिस्टोफर के वकील ने अपनी बहस पूरी की और उसी के साथ कोर्ट की घड़ी में चार बज गए। न्यायाधीश ने सुनवाई की अगली तारीख मुकर्रर करते हुए उस दिन कोर्ट का अवसान कर दिया।

पर क्रिस्टोफर और उनकी पत्नी जेनी कोर्ट की कार्यवाही तक ही सीमित नहीं थे। अनुवांशिक प्रदूषण के खतरे से पूरे विश्व को आगाह करने के लिए पैदल विश्व भ्रमण पर निकल रहे थे।

5 टिप्‍पणियां:

डा0 दिनेश चन्द्र अवस्थी ने कहा…

रोचक एवं सार्थक विज्ञान कथा है,

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

बहुत ही बढ़िया कथा है मित्र लेकिन ये डा- अवस्थी और कविता भी विग्यान कथा पात्र हैं क्या...? क्योंकि इनकी प्रोफाइल्स तो खुलती नहीं....

आकांक्षा~Akanksha ने कहा…

सुन्दर ब्लॉग...सुन्दर रचना...बधाई !!
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60 वें गणतंत्र दिवस के पावन-पर्व पर आपको ढेरों शुभकामनायें !! ''शब्द-शिखर'' पर ''लोक चेतना में स्वाधीनता की लय" के माध्यम से इसे महसूस करें और अपनी राय दें !!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सार्थक विज्ञान कथा।
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तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखा आपने...पसंद आई आपकी रचना.

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पाखी की दुनिया में- 'जब अख़बार में हुई पाखी की चर्चा'